तुम आओ ना आओ,
मुझे बस,इतना बता दो
राज़ पुराना खोल कर कहो।
बांधा क्यों इतना गहरा बंधन
बन गये तुम श्वासो का स्पंदन!
भारी बना है जीवन हर दिन,
कांटे ना कटती, लम्बे पल-छिन!
समय बना है,अनसुलझा रिण
विचित्र विचारों से घिरा यह मन।
ऐसा क्या कर्म किया मैंने
गहन अंधेरा छाया घर में
आस का दीपक बुझ ना जाए
कलि बिना खिले ही ना मुरझाए!
लगता नहीं अब मन यह मेरा
देखता हर पल आस है तेरा
टूट गया मेरी नाव का बेड़ा
जाने कैसे आयेगा सवेरा?