समझदार है पर कुछ भी कह जाते हैं
दर्द दिल का वो कभी ना समझ पाते हैं
हैं वो बुजुर्ग लेकिन उनमें समझ नहीं
उनके सुझाव मुझे कितना तड़पाते हैं।
वो क्या जाने कैसे बनाया घरौंदा हमने
उनको चांदी की चम्मच मिली खाने में
मैंने कैसे ईंट जोड़ बनाया घोंसले को
मिलाया कैसे सीमेंट बालू गिट्टी गारे में।
दर्द कितना हुआ यह मैं हूं बस जानती
उनके लिए तो सब बेकार कीमत है
बहुत आसानी से कहा बेदर्द गैरत है
“अब वह सब तुम्हारे लिए बेकार है,!”
ऐसे लोगों से पहले भी चोट खाया मैं ने
आंसू बहाकर बहुत रोया है मैने
कसका है मन मेरा,दुआ ना निकली
जब से सुना है दिल है बेचैनी में