अमर शहीद

नमन मंच

मानसरोवर काव्य मंच
विषय-अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव
विधा-कविता
तिथि -२३-३-२५
शीर्षक -अमर शहीद

                 "अमर शहीद "

लिख कर लाल लकीरों से कहानी,
कर दिया वतन के नाम ज़िन्दगी

अनगिनत ने जिया ऐसी जवानी ।
धैर्य को बनाकर अपनी रवानी!

सुनकर हिंद के वीरपथिको की कथा,
बह पड़ा काजल बन, मां की व्यथा ।

गिन नहीं पाएंगे कितने बलिदानी थे?
कितने भगतसिंह, राजगुरू सुखदेव थे!

इन सपूतों की गिनती नहीं हो सकती
सुभाष सीकितने ही खुदीराम की थी सुमती।

अत्याचारियों ने खीच ली थी अंगों की झिल्ली
आहत कर तन को, नहलाया खूनी होली ।

फिर भी जांबाजो की ना निकली आह की बोली।
रंग लिया था उन्होंने चोला रक्त बसंती ।

भर कर तन मन में आजादी की धुन को।
देते रहे आहूती स्वतंत्रता यज्ञ में बलिदान को।

जज्बातें हिन्द के बच्चों ने ऐसा पहना भगवा चादर।
बरपाया अंग्रेज़ों पर अनोखा तूफानी कहर।

मां भारती के पूतों ने जगाया सारे भरत को।
गोरे लाचार हुए देख डूबते यूनियन जैक को।

यह कहानी है उन सभी शहीदों की भी,
लिख ना सका इतिहास कुर्बानी जिनकी।

नमन है बारम्बार उन सब नौनिहालों को!
मिली जिनसे स्वतंत्रता हम देशवासियों को।

स्वरचित एवं मौलिक।
अप्रकाशित रचना।

शमा सिन्हा
रांची,झारखंड।

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