Category: Hindi Poetry
Silence Prevails
The Sun rose few hours ago, Soon moon will decend low! Every particle follows that rule Changes of retaining ,fusing minuscule! All that which is today alive, On completion it will dive! Yet a fear grips now and then Releasing doubts as dried stem! It’s existence was a puzzle of yester Why then its lovers severally pester? Known to all are laws of life and death Why not enjoy then the interim with mirth? Each morning duly rises with Sun’s light Glides to peak then it doth slide! Moon then takes it’s chance to shine. On sky ,a cool calm …
Wah Kaali badri aayee hai!
नटखट नवेली चुपके से बिजली बिंदी चमकाई है उडते हुये परिंदों के पंखों मे जा, यहसमाई है यहाँ छमछम यह करती, वहाँ रुनझुन बरसाती है रवि किरणों के संग कहीं, अधीर हो मुस्काती है कहीं लहरा कर चदरिया नीली, सपने कई सजाती है हरी बनी वसुधा पर फिर रसीली फुहार बरसाती है। कहीं मचलती, कभी उछलती, पीहर से यह आई hai थिरकती, मुदित मन -कुसुमी तन से, रुक रुक कर है किलकारती । कहती सबसे कानों में, “लाई पिया-स्नेह भरा आंचल अपार, छींट छींट, बांट बांट कर, सजा दूंगी मैं सौगात अम्बार घर आंगन उन सबका, देख रहे जाने कबसे …
Barkha bawri
मचल मचल कर वह बांवरी, यूं बरसने आई है ढक गया नीलनभ भी, धुंध श्याम छवि लाई है। खो गई डालियां, कलियां कोमलांगी झड गई हैं। प्रीत अनोखी, धरा-गगन की, रास रंग की छाई है। कतारों मे चल रहीं,रंगीली जुगनुओं सी गाडिय़ां । सरसराती, कभी सरकती, झुनझुनाती पैजनियां । देखो कैसी रुनकझुनक, मस्ती संग ले आई है । सब पूछ रहे रसरजिंत हो, यह क्यों ऐसे मदमायी है? नांच रहा कोई, ऐसा कौन रंग बरसाई है छुप रहा कोई-पत्तियों तले ना ये जा पाई है गा रहा कोई- यूं राग तरिंगिनी बन यह आई है रोको न इसके कदम-ले जाने …