“लगन तुमसे लगा बैठे “
मानसरोवर साहित्य अकादमीभोर सुमिरनदिनांक ३.४.२५प्रदत्त विषय – लगन तुमसे लगा बैठे लगन तुमसे लगा बैठे बेखबर हम कृष्ण।चले ढूंढते तुम को कुंज की हर शाख तृण।। देख वृक्ष से लटका वह तुम्हारा पीताम्बर ।मस्ती में लगी डोलने, उसकी बन मै चंवर।। छेड़ दी मोहन तुमने यह कैसी चाहत की धुन।खोकर सुध मैं लगी थिरकने, तुम्हारी मीरा बन।। जपती माधव नाम तुम्हारा,खोजती पदचाप तुम्हारे।बन बावली नित तकती पथ, बसती जमुना तीरे।। ढूंढ ढूंढ फूल वैजन्ती के, मैं माला गूंथा करतीचपल कदम से मैं तु।लेकर प्रेम उपहार तुम्हारा,आस में बैठी रहती।।वन के कोने कोने जब जब गूंजती धुन बेणु की। सुन लो …